चूहों की चर्चा यदि आप राजस्थान में करनी देवी के मंदिर में दर्शन करने जा रहे हैं तो चूहेदानियों को पीछे छोड़ जायें। देशनोक ग्रम के इस मंदिर में चूहों का सम्मान किया जाता है, उन्हें खिलाया जाता है और उनकी रक्षा की जाती हैं। वे झुण्ड के झुण्ड वहॉं भरे रहते हैं जहॉं स्थानीय लोग उनकी रक्षा करते हैं। उनका विश्वास है कि चूहों में मानव आत्माएँ कुछ समय के लिए तब तक निवास करती हैं जब तक उनके लिए मानव शरीर तैयार नहीं हो जाता। एक स्थानीय जनश्रुति के अनुसार सैकड़ों वर्ष पहले देशनोक में करनी देवी नाम की एक संन्यासिनी थी। अपनी चामात्कारिक शक्ति के लिए वह विख्यात थी। ऐसा कहा जाता है कि एक बार एक बच्चे की मृत्यु हो जाने पर उसने भगवान से उसके जीवन के लिए प्रार्थना की। भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली, किन्तु बालक तुरंत पुनर्जीवित नहीं हो सका, क्योंकि उस समय सुयोग्य मानव शरीर उपलब्ध नहीं था। इसलिए जब तक उसकी आत्मा के लिए मानव शरीर उपलब्ध नहीं हुआ वह चूहे के रूप में जन्मा। तब से देशनोक निवासियों के लिए चूहे प्रिय हैं। करनी देवी का मंदिर आज भी चूहों के लिए सुखद-सुरक्षित स्थान है। मधुर वाची तेलुगु भाषी इसे सुनकर फूले न समायेंगे। उनकी मातृ भाषा संसार की ऐसी केवल दो भाषाओं में से एक है जिनकी अनोखी विशेषता यह है कि इनके प्रत्येक शब्द के अन्त में स्वर होता है। और दूसरी भाषा कौनसी है जिसमें यह विशेषता है? इतालवी ! |