मुनियों ने सूत महर्षि से पूछा, ‘‘मुनींद्र! हमने सुना है कि विष्णु अपने एक अन्य रूप कृष्ण की आकृति में गोलोक में वास करते हैं। हम उस कृष्ण के बारे में पूरा वृत्तान्त सुनना चाहते हैं।’’ इस पर सूत मुनि ने यों कहना प्रारम्भ किया- सत्य लोक के ऊपर गोलोक है। वह सदा-सर्वदा अनेक नक्षत्रों के समूह के साथ ज्योत्सना से भरा रहता है।
विष्णु अत्यन्त गहरे नीले रंग के कृष्ण के नाम से वहॉं पर प्रवाहित होने वाली दिव्य नदी विरजा के तट पर तुलसी वन में मुरली बजाते दिव्य संगीत की रचना करते रहते हैं। उस मुरली के भीतर से ध्वनित होनेवाले नाद ने राधा की आकृति धारण की। राधा प्रकृति तथा कृष्ण पुरुष के रूप में एक दूसरे से कभी अलग न होने वाली जोड़ी के रूप में गोलोक में विहार किया करते हैं। सुदाम सदा-सर्वदा उनकी सेवा किया करता है।
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