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सौंदर्य

उसके इस उत्तर पर बेहद खुश होते हुए जयंत  ने कहा, ‘‘तुम तो कुरूपिणी हो ही नहीं। दिव्य मनमोहक रूप में चमक रही हो। मैंने तुमसे विवाह रचाने का निर्णय कर लिया है,’’ कहते हुए उसने चित्रलेखा का हाथ पकड़ लिया। दूसरे ही क्षण, चित्रलेखा को अपना असली रूप प्राप्त हो गया।  वेताल ने यह कहानी सुनाने के बाद अपने संदेहों को व्यक्त करते हुए, राजा विक्रमार्क से पूछा, ‘‘राजन्, ...

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